प्यार दे कोई

प्यार दे कोई

कुलदीप आज़ाद

बस मुहब्बत की मुझे ज़रूरत है
बेइंतहाँ आ के प्यार दे कोई

फिर दिल से रूख़सती को न कहना
चाहे सीने में खंज़र उतार दे कोई

माना तन्हा सही पर आज भी मैं जिंदा हूँ
आ के करीने से मुझको सँवार दे कोई

मेरे दिल की ज़मीं में आज भी गुलाब पलते हैं
खिलेगें, शर्त पहले प्यार की फुहार दे कोई

दिलों से खेलने को तूने अपना शौक़ कहा था
हैं दुआ ईश्क़ में तुझको करारी हार दे कोई

सिवाय बेवफ़ाई उम्र भर तूने दिया क्या
क्यों तेरी याद में जीवन गुज़ार दे कोई

मुझसे ज़्यादा भी कोई और तुम्हें चाहता है
ख़ुदा ये सुनने से पहले ही मार दे कोई

बहकेगें क़दम तेरे, संभालेगा मेरा कंधा
कहोगी उस दिन कि मुझ-सा यार दे कोई

उन्होंने अब तलक मुझको कभी क़ाबिल नहीं समझा
मेरे कंधों का उनको इक दिन आधा तो भार दे कोई

अनजाने में कई काम अधूरे छूटे
आज एक ज़िंदगी उधार दे कोई

है ख़्वाहिश आख़िरी साँस मेरी अटकी हो हलक़ में
वो मुझको चाहती थी ला के ऐसा तार दे कोई

6 Responses to “प्यार दे कोई”

  1. 1
    neel Says:

    badhiya hai bhai.. gud going..sach me achcha likh rahe ho mitr. badhai

  2. 2
    Kuldeep Azad Says:

    ये मेरी लिखी पहली ग़ज़ल थी
    आप शाएद भूल गए होंगे
    पर
    सबसे पहले तो आपको ही सुनाई थी

    सर ….!

  3. 3
    deep Says:

    samay say pahlay yadi tum bayvafa ban gay hotay to aisa ulta hota. samy ki najkat ko pahchan nahi pay isliy har maan kar ab ish adhya ko band karo aur kuch naya srijan karo.

  4. 4
    Jagveer Singh Says:

    Hi Gooood Morning
    Aaj Teri Kavita Padi (PIYAAR DE KOI)
    Awesome men
    u r great personality
    it’s true bhai
    kamaaal ki likhi
    me aaaj se tera Murid ho gaya
    aur soch raha hooon ki
    me tujhse kavita likhne ke tips lu
    gooooood going dear

  5. 5
    Kuldeep Azad Says:

    Deepji,
    Maine suna hai ki samay se Pahle kuch nahi hota

    Aur ye bhee aap jaante hain ki Haar maanne walon main kum se kum Main to nahi hoon….

    Srijaan Jaari hai…….!

  6. 6
    Kuldeep Azad Says:

    Thanks Bhai jagveer,

    tujhe Bhee time mil gaya Kavitaayen padhne ka…!
    Gr888888

    Mera Muridd mat Ban Bhai main Marij Ban jaaunga.!

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