रचनाएँ

माँ

सुनील जोगी

किसी की ख़ातिर अल्‍ला होगा, किसी की ख़ातिर राम
लेकिन अपनी ख़ातिर तो है, माँ ही चारों धा
जब आँख खुली तो अम्‍मा की गोदी का एक सहारा था
उसका नन्‍हा-सा आँचल मुझको भूमण्‍डल से प्‍यारा था
उसके चेहरे की झलक देख चेहरा फूलों-सा खिलता था
उसके स्‍तन की एक बूंद से मुझको जीवन मिलता था
हाथों से बालों को नोचा, पैरों से खूब प्रहार किया
फिर भी उस माँ ने पुचकारा हमको जी भर के प्‍यार किया
मैं उसका राजा बेटा था वो आँख का तारा कहती थी
मैं बनूँ बुढ़ापे में उसका बस एक सहारा कहती थी
उंगली को पकड़ चलाया था पढ़ने विद्यालय भेजा था
मेरी नादानी को भी निज अन्‍तर में सदा सहेजा था
मेरे सारे प्रश्‍नों का वो फौरन जवाब बन जाती थी
मेरी राहों के काँटे चुन वो ख़ुद ग़ुलाब बन जाती थी
मैं बड़ा हुआ तो कॉलेज से इक रोग प्‍यार का ले आया
जिस दिल में माँ की मूरत थी वो रामकली को दे आया
शादी की, पति से बाप बना, अपने रिश्‍तों में झूल गया
अब करवाचौथ मनाता हूँ माँ की ममता को भूल गया
हम भूल गए उसकी ममता, मेरे जीवन की थाती थी
हम भूल गए अपना जीवन, वो अमृत वाली छाती थी
हम भूल गए वो ख़ुद भूखी रह करके हमें खिलाती थी
हमको सूखा बिस्‍तर देकर ख़ुद गीले में सो जाती थी
हम भूल गए उसने ही होठों को भाषा सिखलाई थी
मेरी नींदों के लिए रात भर उसने लोरी गाई थी
हम भूल गए हर ग़लती पर उसने डाँटा-समझाया था
बच जाऊँ बुरी नज़र से काला टीका सदा लगाया था
हम बड़े हुए तो ममता वाले सारे बन्‍धन तोड़ आए
बंगले में कुत्ते पाल लिए माँ को वृद्धाश्रम छोड़ आए
उसके सपनों का महल गिरा कर कंकर-कंकर बीन लिए
ख़ुदग़र्ज़ी में उसके सुहाग के आभूषण तक छीन लिए
हम माँ को घर के बँटवारे की अभिलाषा तक ले आए
उसको पावन मंदिर से गाली की भाषा तक ले आए
माँ की ममता को देख मौत भी आगे से हट जाती है
गर माँ अपमानित होती, धरती की छाती फट जाती है
घर को पूरा जीवन देकर बेचारी माँ क्‍या पाती है
रूखा-सूखा खा लेती है, पानी पीकर सो जाती है
जो माँ जैसी देवी घर के मंदिर में नहीं रख सकते हैं
वो लाखों पुण्‍य भले कर लें इंसान नहीं बन सकते हैं
माँ जिसको भी जल दे दे वो पौधा संदल बन जाता है
माँ के चरणों को छूकर पानी गंगाजल बन जाता है
माँ के आँचल ने युगों-युगों से भगवानों को पाला है
माँ के चरणों में जन्नत है गिरिजाघर और शिवाला है
हिमगिरि जैसी ऊँचाई है, सागर जैसी गहराई है
दुनिया में जितनी ख़ुशबू है माँ के आँचल से आई है
माँ कबिरा की साखी जैसी, माँ तुलसी की चौपाई है
मीराबाई की पदावली ख़ुसरो की अमर रुबाई है
माँ आंगन की तुलसी जैसी पावन बरगद की छाया है
माँ वेद ऋचाओं की गरिमा, माँ महाकाव्‍य की काया है
माँ मानसरोवर ममता का, माँ गोमुख की ऊँचाई है
माँ परिवारों का संगम है, माँ रिश्‍तों की गहराई है
माँ हरी दूब है धरती की, माँ केसर वाली क्‍यारी है
माँ की उपमा केवल माँ है, माँ हर घर की फुलवारी है
सातों सुर नर्तन करते जब कोई माँ लोरी गाती है
माँ जिस रोटी को छू लेती है वो प्रसाद बन जाती है
माँ हँसती है तो धरती का ज़र्रा-ज़र्रा मुस्‍काता है
देखो तो दूर क्षितिज अंबर धरती को शीश झुकाता है
माना मेरे घर की दीवारों में चन्‍दा-सी मूरत है
पर मेरे मन के मंदिर में बस केवल माँ की मूरत है
माँ सरस्‍वती, लक्ष्‍मी, दुर्गा, अनुसूया, मरियम, सीता है
माँ पावनता में रामचरितमानस् है भगवद्गीता है
अम्‍मा तेरी हर बात मुझे वरदान से बढ़कर लगती है
हे माँ तेरी सूरत मुझको भगवान से बढ़कर लगती है
सारे तीरथ के पुण्‍य जहाँ, मैं उन चरणों में लेटा हूँ
जिनके कोई सन्‍तान नहीं, मैं उन माँओं का बेटा हूँ
हर घर में माँ की पूजा हो ऐसा संकल्‍प उठाता हूँ
मैं दुनिया की हर माँ के चरणों में ये शीश झुकाता हूँ

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माँ, 8.7 out of 10 based on 36 ratings

49 Responses to “माँ”

  1. 1
    रजनीश कुमार Says:

    आपकी कविता अश्रु निकाल देने में सक्षम है. ऐसा लगता है कि अहसास मेरा ही है… बस शब्द आपके हैं !! जज्बातों को शब्द देने के लिए साधुवाद !!

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  2. 2
    Ashutosh Dwivedi Says:

    Bhai Wah !!!

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  3. 3
    Himansha Says:

    IT IS VERY NICE AND IT REALLY TOUCHED MY HEART.

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  4. 4
    Ashok Chauhan Says:

    Aaj tak itni sundar kavita nahin padhi ,Thanks

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  5. 5
    Piyush Gautam Says:

    pahli kavita jisme kahi bhi rula dene ki takat hai.
    i liked it very much….. suparb…. jai mata di to all…….

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  6. 6
    Dr. Manish, Basti ,UP Says:

    Aap Ne Mujhhe Rula Diya,
    Agar duniya ka har beta aap ki tarah soche to kisi Maa ko dukh na ho,
    Dhanayabad aap ne Maa ke Kasto ko samjhha
    Aap binti hai Maa pa aur rachna likhe jis se log Maa ki dukho ko samajhh sake aua maa ko pyar de.

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  7. 7
    vishal kanase Says:

    Thank’s brother…..

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  8. 8
    gargi Says:

    kuch cheeze bus din chu jae hai……………

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  9. 9
    ajay kumar gupta Says:

    apki kavita se sach me ankho me ashu aa gaye ma ka hath ab sar pe nahi par apki kavita ne ma ki yad dilayi hai

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  10. 10
    rahul Says:

    father and Mather is my god

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  11. 11
    ramesh ramgarh Says:

    MAA LIYE AISE WORD SUNKAR ME APNE AAP KO SAMBHAL NAHI SAKTA .SUNIL JOSHI KO ME THANK KAHTA HU JINHONE AISE KAVITA LIKHI.

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  12. 12
    parul Says:

    its really really nice 1……sach mai bhi rula diya hai….superb…

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  13. 13
    shradds Says:

    its ausum i have made in my fav list..

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  14. 14
    govind bhaiya Says:

    helllo sir i realy like your poem. i also writer.
    i want to say you only a word for u. “maa” is the mor importand then god. i love my mm and ded bt i dont have my ded. please my loard if you meet my ded then say you i miss you so much. i love you “papa”

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  15. 15
    ARVIND KUMAR TEWOTIA Says:

    RES.SIR,

    THANKS JO AAP NAI IS KALYUG MA BHI MAA JASI DEVI KO HAM SABKO YAAD DILA DIYA
    MAA HE SAB KUCH HAI ,MAA HI PAHLA SHABD HAI ,MAA HI AKRI

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  16. 16
    harakh jain pappu Says:

    SUNDAR..

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  17. 17
    SAMEER G. Says:

    फारच सुंदर…Atishay changali kavita ahe…God cnt be everywher dats why he created MOTHER..hope who is goin to read dis..pls pls pls dnt hurt ur MOTHER…आई…माँ…

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  18. 18
    neeraj Says:

    kavita padne ke baad soch raha hoon kya likhu aaj log mandir ki maa ko jayada pujte hai par us maa ka samman nahi karte jo itna kuch hamare liye karti hai.. hafte mein ek din es maa ke liye bhi to nikal kar dekho khushi ke aanshu bah niklenge us maa ki aankhoon say…..

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  19. 19
    हरख जैन पप्पू . Says:

    . अति सुन्दर. माँ से बढ़कर कोई नहीं ,कोई भी नहीं.
    हरख जैन पप्पू .

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  20. 20
    osheen Says:

    maa is god .actually god could not exist everywhere so he send mothers.

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  21. 21
    osheen Says:

    maa is god .actually god could not exist everywhere so he send maa.

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  22. 22
    rahul Says:

    sach mai rula diya hai

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  23. 23
    bhupinder singh Says:

    ES KAVITA NA MUJAY APNEY MAA KI YAD DILA DI …………THANKS

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  24. 24
    Anupam Jain Says:

    is is very dangeros or my heart burning

    this poem i told in my schoo jawahar navodaya vidyala nowgong chhatarpu

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  25. 25
    niraj vrma Says:

    plz Aap aisi kavita likhe ki jo beta maa ko sukh nahi de paya wo use padh kar pachhtae nahi direct aatm-hatya kar le.

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  26. 26
    jainendra shukla Says:

    aapne jo kavita maa ke liye likhi wo sach me maan ko trapt ker deti hai jo bhi kavita me hai wo ek dam sach hai hum aaj ke bhotik sukh me aapne parents ko bhul jate hai jo sach me ek apradh hai.
    i love my mother

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  27. 27
    v s chauhan Says:

    aap ki kavita lajaba hai. AP KE SAMARTHAN ME YEY KUCHH LINE SAMRPIT HAI
    MAMTA KI MURAT HAI MAA KITNI KHUB SURAT HAI MAA
    PAUN CHHU KE GHAR SE NIKLA KARO
    EK SHUBH MAHURAT HAIN MAA

    AASHA HAI AAGE PADNE KO MILEGA MAIN AAP KASATH DUNGA

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  28. 28
    javanaram mali javanaram Says:

    aap ki kavita padne ke baad soch raha hoon kya likhu aaj log mandir ki maa ko jayada pujte hai par us maa ka samman nahi karte jo itna kuch hamare liye karti hai.. hafte mein ek din es maa ke liye bhi to nikal kar dekho khushi ke aanshu bah niklenge us maa ki aankhoon say

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  29. 29
    javanaram mali dayalpura {ahore.jalore} rajasthan Says:

    माँ शब्द दिल से कहते ही मानों हमारा सारे
    दुःख दूर हो जाते है |. मानों हमें दुनिया का
    सुख मिल … हमने भगवान को नही देखा |पर हम अपनी
    माँ में ही भगवान को देखसकते ह”

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  30. 30
    JAVANARAM MALI DAYALPURA [AHORE .JALORE ] RAJASTHAN Says:

    माँ शब्द दिल से कहते ही मानों हमारा सारे दुःख दूर हो जाते है |
    मानों हमें दुनिया का सुख मिल जाता है !”माँ ” हमें सबसे जयादा
    प्यार करती है ||
    माँ घर मे सबसे पहले उठती है /सबके लिय खाना आदि बनाती है /
    सबके जरुरत का ध्यान रखती है/समय समय पर सब का काम करती है
    माँ प्यार , दया और ममता की मूर्ति है ! माँ कभी अपने कर्तब्यो
    से मुह नाहे मोड़ती |वह घर मे सबको मिलकर रहना है |बच्चो के सुख
    को ही अपना सुख मानतीहै |वह कभी किसी से गुस्सा नही करती |
    कोई गलत बात बोले तो भी चुप हीरहती है |फिर भी उसका भला हीचाहती है|
    हमने भगवान को नही देखा |पर हम अपनी माँ में ही भगवान को देखसकते ह” JAVANARAM MALI

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  31. 31
    ramesh mali dayalpura Says:

    अति सुन्दर.

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  32. 32
    JAVANARAM MALI DAYALPURA [ AHORE .JALORE ] RAJASTHAN Says:

    माँ शब्द दिल से कहते ही मानों हमारा सारे दुःख दूर हो जाते है |
    मानों हमें दुनिया का सुख मिल जाता है !”माँ ” हमें सबसे जयादा
    प्यार करती है ||पर हम अपनी माँ में ही भगवान को देखसकते ह”

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  33. 33
    pankaj sukhwal Says:

    apki ki kavita ke madhyam se mai sabse yahi kahna chahta hoo ki yadi kisi ne real me apne jeevan me maa ki mahtav ko jana he to maa ko wo pyaar dena jiski wo haqdar he.
    jina pahle maa ke liye.

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  34. 34
    R.M.TIWARI Says:

    Thanks for lot,

    jo dil ko choo jaye bo he rachnaye hai,apne to
    padhte-2 ankho me anshu aa gye,yeh to maa sarasswati ji pratyshya birajman hai gazab kee rachana hai

    R.M.TIWARI
    DISST-MAHOBA(U.P.)

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  35. 35
    R.M.TIWARI Says:

    Sh. Sunil Jogi ji

    aapne jo bhee kavita banayee hai yeh out standing hai esme jo karun rus dala hai esse ache admi kee
    nayan bhar ayenge,or jo shiksha milegee log mata pita ko jarur apnayge.or apne bhee beete huye kal me pahunch jayenge.

    Thanks for lot

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  36. 36
    विपिन जैन Says:

    अप्रतिम………………

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  37. 37
    Jai Prakash Says:

    Dear Joshiji.
    I am a teacher by profession. Today I read your poem maa. what a wonder poem you have composed.When I was reading this poem literally I was weeping. I was thinking that I am in front of my mother and she is blessing me.
    jp

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  38. 38
    santosh m.p Says:

    thank’s aap ne kavita hi nahi likhi maa bete ke tute hue dil ko namak aur pani jaise mila diya hai
    ish ke lie aapko dhanyvad

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  39. 39
    Aaryan's Says:

    Bahut aacha laga padhke. Maa to maa hoti h…

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  40. 40
    rahul Says:

    ma ko bahut sataya hu par ab pachhatawa aata hai
    ab khabhi nahi paresan karunga ma ko ma to ma hoti hai

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  41. 41
    sunil singh Says:

    माँ का नाता इस दुनिया में सबसे निर्मल नाता है
    इस नाते की इज्जत करना हमको भी नहीं आता है.
    कहाँ गए वो वीर पुत्र जो अपना फर्ज निभाते थे.
    माँ के एक इशारे पर जो अपना शीश कटते थे.

    बहुत अच्छी बिचार हैं आपके, माँ से बढ़कर कोई भगवन नहीं है. और जो भगवन है भी तो वो भी माँ ही है.

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  42. 42
    SANTOSH FROM DARBHANGA(BIHAR) Says:

    MA IS ONE OF THE BEAUTIFUL CREATION OF GOD.
    THANKS TO SUNILG.
    BAHUT AACHA LAGA PADHKE ONCE AGAIN THANK YOU
    VERY MUCH.

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  43. 43
    Rakesh Puri Says:

    Bahut Khub

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  44. 44
    Baldev singh Says:

    A Class of its Own.

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  45. 45
    दीपक चौधरी Says:

    “माँ” को परिभाषित नहीँ किया जा सकता है।
    बहुत ही सुन्दर रचना है, कोटि-कोटि धन्यवाद।

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  46. 46
    JITENDRA KUMAR Says:

    DEAR FRIEND , AAP KI KAVITA DIL KO CHHU GAI
    THANKS

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  47. 47
    LAKHAN LAL Says:

    THANKS JOSHIJI, mother is my God.

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  48. 48
    Rajesh sharma Says:

    MA
    TO
    MA

    HOTE HAI

    CHARO DHAM MA KE CHARNO ME HOTE HAI

    ATI SUNDER KAVITA HAI AAPKI

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  49. 49
    Jitendra Says:

    Thanks, jab mai yeh kavita parh raha tha to mere Ankhon me sirf aur sirf asoon aa rahe the, maine ma ko to kabhi nahi sataya, lekin mai delhi me rahta hun, aur maa ki bahut yaad aati hai, jo ki gaon me rahti hai.

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