विद्या है अनमोल रतन

विद्या है अनमोल रतन

कुलदीप आज़ाद

बुलंदियों को छूना है, पर धरती का ध्यान रहे
बनना बहुत बड़ा है तुमको, निज लघुता पर मान रहे
कब क्या क्यों कैसे करना है- इसका ख़ुद को ज्ञान रहे
विद्या है अनमोल रतन, हर स्वास्थ्य रतन बलवान रहे

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