फूल हूँ

फूल हूँ

विकि आर्य

चाहे तो
निरखते रहो समूचा
चाहे तोड़ दो
पंखुरी-पंखुरी…
फूल हूँ, प्यार हूँ
कहाँ रंग या ख़ुशबू से
बाज़ आना है मुझे

2 Responses to “फूल हूँ”

  1. 1
    Atanu Roy Says:

    Loved the selection by my friend Viky. Looking forward to more.

  2. 2
    Neil Says:

    deaer fren her two books are avalble in the market. cane from penguine..

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