आज़मा लो आंधियों

आज़मा लो आंधियों

विकि आर्य

कल रात तूफ़ानों में
झड़ गए गुलमोहर तो क्या?
आज़मा लो आंधियों आज फिर…
अनगिन खिलने को
बेक़रार हैं आज भी

One Response to “आज़मा लो आंधियों”

  1. 1
    Agnivesh Says:

    very well said sir……… nice one

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