रचनाएँ

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ख़्वाब की किरचें


तुम निश्चिन्त रहना


वेदना


पत्नी, प्रेम और पीड़ा


गर्लफ्रेंड


भारत की घड़ी


हिलता रहा मन


हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है


ये क्या जगह है दोस्तो, ये कौन-सा दयार है


इन्तज़ार


सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान-सा क्यूँ है


देहरी की क़िस्मत


ग़ुलाब हमारे पास नहीं


हद्द-ए-निगाह तक ये ज़मीं है सियाह फिर


एहसास


वसन्त


आया वसंत आया वसंत


वीरों का कैसा हो बसंत


वसंत (दो चित्र)


आए महंत वसंत