रचनाएँ

Tag: Dhansingh

जो लोग शहीदों की तरह मरते हैं


इन्सान ही रहना सीखो


दर्द को सद्भाग्य समझ जीता है


जीवन का मंथन


दुर्भाव सभी मन से निकल जाएंगे


कब कौन कहाँ किसको भलाई देता


निज धर्म पे भाषा पे कोई लड़ता है


लगता कि अबल जीवन है


मानव न अभी तक चेता


दर्द सज़ा देता है


तू अग्नि, सलिल और अनिल भी चंचल