रचनाएँ

Tag: Emotions

नदिया के किनारे


एक पल के लिये मन द्रवित तो हुआ


भंडार घर


व्यापार


ख़तरे में इस्लाम हो नहीं सकता


ख़ुश्बू की खेती


चिराग़ की लौ में कमी नहीं आती


बम नहीं समझता है


दिए से शहर जलाते हैं


हम क्यों बहक रहे हैं


सबसे बड़ा नमूना


गाड़ी चली गई थी


बाहर से नहीं आए हैं


नींदें कहाँ से आएँ


पुरखे नहीं बदल जाते


तुम हाथ थाम लेना


हम भी इसके हैं


महानगर की ज़िंदगी


अब वो ख़ुश है!


भूला नहीं है दिल