रचनाएँ

Tag: Hasya

सेवा


बापू, तुम मुर्गी खाते यदि


ख़तरे में इस्लाम हो नहीं सकता


ख़ुश्बू की खेती


इतिहास का पर्चा


चिराग़ की लौ में कमी नहीं आती


बम नहीं समझता है


दिए से शहर जलाते हैं


हम क्यों बहक रहे हैं


सबसे बड़ा नमूना


गाड़ी चली गई थी


बाहर से नहीं आए हैं


नींदें कहाँ से आएँ


पुरखे नहीं बदल जाते


तुम हाथ थाम लेना


हम भी इसके हैं


एक जिल्द में बांध दो


अपनी आवाज़ ही सुनूँ कब तक


चिन्तन


ज़िंदगी मुश्क़िल से आती है