रचनाएँ

Tag: Humanity

बन गया मानव, जानवर


डरे हुए लोग


जो असहमत होगा


मनुष्य


ख़तरे में इस्लाम हो नहीं सकता


ख़ुश्बू की खेती


चिराग़ की लौ में कमी नहीं आती


बम नहीं समझता है


दिए से शहर जलाते हैं


हम क्यों बहक रहे हैं


सबसे बड़ा नमूना


गाड़ी चली गई थी


बाहर से नहीं आए हैं


नींदें कहाँ से आएँ


पुरखे नहीं बदल जाते


तुम हाथ थाम लेना


हम भी इसके हैं


विश्व-तट पर हो रही क्यों मौन मानवता?


इन्सान ही रहना सीखो


निज धर्म पे भाषा पे कोई लड़ता है