रचनाएँ

Tag: Khoba

इन्सान ही रहना सीखो


दर्द को सद्भाग्य समझ जीता है


जीवन का मंथन


दुर्भाव सभी मन से निकल जाएंगे


तू अग्नि, सलिल और अनिल भी चंचल