रचनाएँ

Tag: love

चांदनी से रात बतियाने सहेली आ गयी


एक स्वर मेरा मिला लो!


तुम निश्चिन्त रहना


पत्नी, प्रेम और पीड़ा


हिलता रहा मन


ग़ुलाब हमारे पास नहीं


नदिया के किनारे


कोई छू ले मन!


भावुक प्रेम


बातें


प्रेम क्या है


डरे हुए लोग


प्रिय मिलने का वचन भरो तो


जा तुझको भी नींद न आए


गोपियाँ


प्रथम चुम्बन की तरह


लहजा ही जज़्बाती है


राज़ हर रंग में रुसवा होगा


वो तनहा है


पलकें बिछाए तो नहीं बैठीं