रचनाएँ

Tag: Neel

मेरी क़लम नमन करती है


सीढ़ी


एक दृश्य


एक दीप


मैं चांद से रूठा


पाने की चाह


मेरे निशां


नदी में एक झील


नींव के पत्थर


लकीरें


लाखों की भीड़ में


दायरे


पुराना पीपल


हर टुकड़े में चांद


एक कहानी फिर सुननी है


मैं बड़ा हो गया हूँ


न जाने कहाँ होंगे


तितलियाँ