रचनाएँ

Tag: Pain

तुम निश्चिन्त रहना


वेदना


पत्नी, प्रेम और पीड़ा


हिलता रहा मन


नदिया के किनारे


कैसे हो तुम?


मेरा नाम लिया जाएगा


गोपियाँ


मैं ज़िन्दा हूँ ये मुश्तहर कीजिए


वापस चला गया


राज़ हर रंग में रुसवा होगा


समाधान


मरहम


सीढ़ी


भूख के अहसास को शेरो-सुख़न तक ले चलो


न महलों की बुलंदी से, न लफ़्ज़ों के नगीने से


सूनी सांझ


दर्द ये सोचकर कमाया है


रह गया


हालात