रचनाएँ

Tag: Patriotic

हिमालय


वीरों का कैसा हो बसंत


मन आज़ाद नहीं है


जो आग नहीं बन सकते


तिरंगा


ऐ गम-ए-दिल क्या करूं


झाँसी की रानी


भारत देश


जागो फिर एक बार


सारी दुनिया देखेगी


आवाह्न


ख़तरे में इस्लाम हो नहीं सकता


ख़ुश्बू की खेती


चिराग़ की लौ में कमी नहीं आती


बम नहीं समझता है


मेरी क़लम नमन करती है


दिए से शहर जलाते हैं


हम क्यों बहक रहे हैं


सबसे बड़ा नमूना


गाड़ी चली गई थी