रचनाएँ

Tag: Poem

हिमालय


कोई छू ले मन!


बेटियाँ


झूठ की उम्र


गाँव-खेत-जंगल


सत्संग


ज़रा-सी देर में दिलकश नज़ारा डूब जायेगा


जो असहमत होगा


प्रिय मिलने का वचन भरो तो


जा तुझको भी नींद न आए


बनफूल


गोपियाँ


दिल्ली एक मेरी भी


मेरे देश के संदेश


अभी न होगा मेरा अन्त


जिल्द बंधाने में कटी


मेरी कविताएँ


एक हरा अहसास जिया


कैसट


प्यार के दो बसन्ती लम्हें