रचनाएँ

Tag: Rubai

इन्सान ही रहना सीखो


ख्वाबों को बनाना होगा


मंदिर में ही भगवान


पानी में भी आग लगाना सीखो


हर साँस को विश्वास बना


अनजान की पहचान


समदर्शी ही होता दर्पण


दुर्भाव सभी मन से निकल जाएंगे


कब कौन कहाँ किसको भलाई देता


दर्द सज़ा देता है


तू अग्नि, सलिल और अनिल भी चंचल