रचनाएँ

Tag: Sudhakar

इन्सान ही रहना सीखो


दर्द को सद्भाग्य समझ जीता है


जीवन का मंथन


दुर्भाव सभी मन से निकल जाएंगे


लगता कि अबल जीवन है


मानव न अभी तक चेता


दर्द सज़ा देता है


तू अग्नि, सलिल और अनिल भी चंचल