कवि-परिचय

रामप्रसाद बिस्मिल

ramprasadbismil

पंडित रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ का जन्म उत्तर प्रदेश के शहाजहाँपुर ज़िले में सन् 1897 में हुआ। यह वह समय था जब देश में राष्ट्रीय आन्दोलन ज़ोरों पर था। देश में ब्रिटिश हुक़ूमत के ख़िलाफ़ एक ऐसी लहर उठने लगी थी जो पूरे अंग्रेजी शासन को लीलने के लिए बेताब हो चली थी। बिस्मिल में भी बचपन से ही ब्रिटिश हुक़ूमत के ख़िलाफ़ एक गहरी नफ़रत घर कर गई। अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ान, चन्द्रशेखर आज़ाद, भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव और ठाकुर रोशनसिंह जैसे क्रांतिकारियों से सम्पर्क में आने के बाद आपने अंग्रेजों की नाक में दम करना शुरू कर दिया। ब्रिटिश साम्राज्य को दहला देने वाले काकोरी कांड को आपने ही अंजाम दिया था।
इतना ही नहीं अपनी क़लम के माध्यम से भी आप ब्रिटिश हुक़ूमत की ऑंख की किरकिरी बन गए। ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ जैसा अमर गीत लिखकर आपने क्रांति की वो चिनग़ारी छेड़ी जिसने ज्वाला का रूप लेकर ब्रिटिश शासन के भवन को लाक्षागृह में परिवर्तित कर दिया। आपने बिस्मिल अज़ीमाबादी के नाम से भी काफ़ी शाइरी की। जीवन के अंतिम सफ़र में जब आपको गोरखपुर जेल भेजा गया तो आपने आत्मकथा भी लिखी।
19 दिसम्बर 1927 को आपको देशभक्ति के अपराध में फाँसी दी गई।

रामप्रसाद बिस्मिल की रचनाएँ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

4 Responses to “रामप्रसाद बिस्मिल”

  1. 1
    vijay Says:

    thanks

  2. 2
    'Krant'M.L.Verma Says:

    To know something more about Bismil kindly log on krantmlverma.blogspot.com @ my articles on Pt.
    Ram Prasad ‘Bismil’: a warrior of Pen & Pistol.

  3. 3
    RAMCHANDER DESHPREMI Says:

    Vo insan ke roop me bhagwan the kas ese log aaj hote. lekin aaj ke jamane me kon inko phuchhta agar phuchhte to shayad baba ramdev ki aaj sare log puja karte.
    khair, call me@09799061426

  4. 4
    अनूप मिश्र Says:

    नदी काव्य प्रडेंता डा. अनन्त राम मिश् का जीवन परिचय देने की कृपा करें

Leave a Reply