कवि-परिचय

गोग

gog

4 दिसंबर 1988 को छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले में जन्मे गोग इस समय दिल्ली में रह रहे हैं। छोटी-छोटी क्षणिकाओं के माध्यम से तीर की तरह सीने में गड़ जाने के हुनर में दक्ष गोग चित्रकारी और छायांकन का भी शौक़ फ़रमाते हैं।
आपकी औपचारिक शिक्षा विद्यालय तक ही सीमित रही लेकिन ज़िंदगी को देखने का आपका नज़रिया डिग्रियों का मोहताज़ नहीं है। सूक्तियों की तरह अभिव्यक्त होती गोग की बेहद निजी अनुभूतियाँ इतनी सशक्त हैं कि जब तक अंतिम शब्द पढ़ा न जाए, तब तक उसका अंदाज़ा लगा पाना नामुमक़िन होता है। गोग की क्षणिकाएँ सबको अपनी-सी लगने वाली ऐसी भावाभिव्यक्तियाँ हैं, जिनमें सादगी से उकेरा गया एक ऐसा अनोखा शिल्प है जो अन्यत्र कहीं मिलना बेहद मुश्क़िल है।
ये रचनाकार कविता की तलाश में समाज से बाहर नहीं जाता, बल्कि जब अपनी निजी ज़िंदगी में वह व्यस्तताओं से घिरने लगता है तो कविता स्वयं उसके पास चली आती है। और जिस सादगी का जीवन गोग जी रहे हैं, वैसी ही सादगी उनकी रचनाओं में भी दिखाई देती है, और यही एक सच्चे रचनाकार की पहचान है।

गोग की रचनाएँ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

2 Responses to “गोग”

  1. 1
    sapna Says:

    hello gog ji…………

  2. 2
    sapna Says:

    aur kya hal hai kav ji………..?

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