हरिवंश राय बच्चन

हरिवंश राय बच्चन

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27 नवंबर 1907 को इलाहाबाद में जन्मे हरिवंश राय बच्चन ने प्रयाग विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद विश्वविद्यालय से पीएच.डी. किया। आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन किया और बाद में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिन्दी विशेषज्ञ रहे। राज्यसभा के मनोनीत सदस्य के रूप में भी आपने दायित्व निर्वाह किया।
हालावाद के एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ के रूप में बच्चन जी सदैव याद किये जाएंगे। मधुशाला जैसी अमर कृति के इस रचयिता को अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए।
गीतों के इस सौदागर के गीतों में दर्शन, प्रेम और आध्यात्म सहज ही झलक उठते हैं। ‘निशा-निमंत्रण’, ‘प्रणय पत्रिका’, ‘मधुकलश’, ‘एकांत संगीत’, ‘सतरंगिनी’, ‘मिलन यामिनी’, ”बुद्ध और नाचघर’, ‘त्रिभंगिमा’, ‘आरती और अंगारे’, ‘जाल समेटा’, ‘आकुल अंतर’ तथा ‘सूत की माला’ नामक संग्रहों में आपकी रचनाएँ संकलित हैं। आपकी कृति ‘दो चट्टाने’ को 1968 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मनित किया गया। इसी वर्ष उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार तथा एफ्रो-एशियाई सम्मेलन के कमल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
आपकी आत्मकथा चार भागों में प्रकाशित हुई है। बिड़ला फाउन्डेशन ने इस आत्मकथा के लिये आपको सरस्वती सम्मान दिया।
सहजता और संवेदनशीलता उनकी कविता का एक विशेष गुण है। यह सहजता और सरल संवेदना कवि की अनुभूति मूलक सत्यता के कारण उपलब्ध हो सकी। बच्चन जी ने बडे साहस, धैर्य और सच्चाई के साथ सीधी-सादी भाषा और शैली में सहज कल्पनाशीलता और जीवन्त बिम्बों से सजाकर सँवारकर अनूठे गीत हिन्दी को दिए।
18 जनवरी सन् 2003 को मुम्बई में आपका निधन हो गया।

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