कवि-परिचय

विनय विश्वास

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18 मार्च 1962 को दिल्ली में जन्मे विनय विश्वास की कविताएँ मनुष्य के संवेदी अनुभवों की सहज अनुभूतियाँ हैं। पिछले दो दशक से हिन्दी काव्य मंच पर विचार कविताओं की गूंज उठाने वाले विनय विश्वास, अपनी सीधी-सपाट बातगोई के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में आप दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापन कार्य में संलग्न हैं। कविताओं में भी ऐसा जान पड़ता है कि आप समाज का अवलोकन एक अध्यापक की भाँति ही करते हैं। बेहद बारीक़ी से सामाजिक परिवेश को जाँचते हुए आप सीधे-सीधे उस बिन्दु की ओर इशारा करते हैं जो यद्यपि समाज का एक हिस्सा तो लगता है लेकिन कहीं न कहीं किसी न किसी विडम्बना को जन्म देता है।
डॉ. विनय विश्वास की लेखनी सत्य को जिस हिम्मत से बयान करती है, उनकी तर्कबुध्दि उसी हिम्मत से उसको सिध्द भी करती है। सत्यभाषण के लिए जिस हिम्मत की आवश्यकता है, उसी हिम्मत के साथ कवि-सम्मेलनों में एक प्रवाहमय काव्यपाठ करने वाले विनय विश्वास हिन्दी की वाचिक परंपरा के एक लाडले रचनाकार हैं।
आपके काव्यपाठ के दौरान श्रोताओं में एक रोमांच और उल्लास के साथ-साथ आत्मविश्वास तथा आत्मशोधन की भी भावना स्पष्ट दिखाई देती है। ‘पत्थरों का क्या है’ नाम से आपका एक काव्य संग्रह बाज़ार में उपलब्ध है।

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