कवि-परिचय

धनसिंह खोबा ‘सुधाकर’

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3 अक्टूबर सन् 1935 को दिल्ली में जन्मे धनसिंह खोबा ‘सुधाकर’ हिन्दी रुबाई के एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। विज्ञान तथा क़ानून विषय से शिक्षाध्ययन करने वाले ‘सुधाकर’ जी अपनी रचनाओं में विविध प्रयोग करते हैं। हालावाद की नवीनतम आध्यात्मिक कृति ‘मधुसागर’ की रचना आपकी इसी प्रयोगोन्मुखी प्रवृत्ति की ओर इंगित करती है। इस अनूठे काव्य को रायपुर की सृजक सम्मान संस्था ने पुरस्कृत भी किया है। जनवरी सन् 2008 में आपका हिन्दी रुबाइयों का एक संग्रह ‘रुबाई दर्शन’ प्रकाशित हुआ।
भारतीय राजस्व सेवा के आयकर विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद आप दिल्ली उच्च न्यायालय में वक़ालत कर रहे हैं। आपके विषय में प्रोफ़ेसर सादिक़ का मानना है कि- ”श्री धनसिंह खोबा ‘सुधाकर’ से पहली ही मुलाक़ात में मुझे यह अंदाज़ा हो गया था कि वे हिन्दी और उर्दू के छन्दों का अच्छा ज्ञान रखते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि काव्य-शास्त्र और छंद विधान की जानकारी रखने वाले ख़ुद अच्छी कविता नहीं कर पाते। सुधाकर जी इसका अपवाद हैं।”

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