जगपाल सिंह ‘सरोज’

जगपाल सिंह ‘सरोज’

विक्रमी संवत् 1991 की शरद पूर्णिमा को जन्मे जगपाल सिंह ‘सरोज’ का जन्म ग़ाज़ियाबाद जनपद में पिलखुआ नामक स्थान के समीप एक छोटे से गाँव में हुआ। हिन्दी से स्नातकोत्तर तक शिक्षाध्ययन करने वाले जगपाल सिंह जी हिन्दी कविता के इतिहास में एक सशक्त तथा लोकप्रिय गीतकार के रूप में दर्ज होंगे। पावनता और शृंगार के एक अद्भुत सम्मिश्रण के दर्शन जगपाल सिंह ‘सरोज’ जी के गीतों में अनेक स्थानों पर होते हैं। आपके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आगरा से प्रकाशित पत्रिका ‘साहित्यालोक’ ने एक विशेषांक भी प्रकाशित किया। आपका गीत संग्रह ‘नीलकंठी हो गए सपने’ पाठकों के लिए उपलब्ध है। अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित जगपाल सिंह ‘सरोज’ जी के गीत संग्रह की भूमिका में पद्मश्री गोपालदास नीरज ने लिखा है- ”आज जब अपराध का भी मज़हबी अनुवाद होने लगा है- ऐसे में गीत-लेखन अत्यंत विरल हो जाना स्वाभाविक है- लेकिन फिर भी कुछ गीतकार हैं, जो गीत की ध्वजा को बड़े गौरव और गरिमा के साथ संभाले हुए हैं। प्रचार-प्रसार से दूर जो लोग बरसों से गीत से जुड़े रहे और गीत को भिन्न-भिन्न रूपों में गाते और गुनगुनाते रहे उन्हीं में से एक नाम जो बड़े प्रेम और आदर से मेरे मन में बरसों बसा रहा वह नाम है- ‘नीलकंठी हो गए सपने’ के रचयिता श्री जगपाल सिंह ‘सरोज’ का। भीड़ के हाथों न बिकनेवाला ‘सरोज’ जी का बंजारा मन मौन साधक के समान काव्य-साधना करता हुआ गीत के भण्डार को निरंतर समृध्द करता रहा है और आज मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि जिसने उनके गीतों के साथ यात्रा नहीं की- समझो उसके हाथ से गीत की एक बहुमूल्य कड़ी छूट गई है। उनकी चर्चा किए बिना गीत-काव्य का इतिहास अधूरा ही मान जाएगा।”

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