कवि-परिचय

महेन्द्र प्रजापति

mahendra

11 अगस्त सन् 1987 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले में जन्मे महेन्द्र प्रजापति इस समय दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी भाषा से स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षाध्ययन कर रहे हैं। वे सामाजिक रूप से अतीव सक्रिय हैं तथा अनेक महत्वपूर्ण कार्यों में अपना सहयोग दे रहे हैं।
महेन्द्र की कविताओं में व्यंग्य की एक ऐसी तीक्ष्ण धार है जो समाज में व्याप्त वर्गभेद तथा अन्य विद्रूपताओं को बेनक़ाब करने में सामर्थ्यवान हैं। आज के तथाकथित विकसित समाज में निर्धनता और सादगी किस प्रकार अभिशप्त जीवन का आधार बन चुकी हैं, इसकी मार्मिक तस्वीर महेन्द्र की रचनाओं में उकरती है। महेन्द्र प्रजापति का कथ्य उनके शिल्प पर सदैव हावी दिखाई देता है।

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3 Responses to “महेन्द्र प्रजापति”

  1. 1
    Rajendra Prasad Says:

    Hi Mahendra,
    I like it very much. Very good. Keep it up.

    Thanks

  2. 2
    munna kumar Says:

    hello bhaiya i know u r very much social & your thoughts r very high.keep it up. may god bless u

  3. 3
    sakshi Says:

    ap bahut achha likhte ho………..
    best of luck 4 future n god bless u………..
    tk cr………:)

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