PAWAN SRIVASTAVA पवन श्रीवास्तव

PAWAN SRIVASTAVA पवन श्रीवास्तव

pawan-srivastava-2

4 अप्रेल सन् 1954 को आरा में जन्मे पवन श्रीवास्तव मूलत: कबीर की परंपरा के कवि हैं। विद्यालयी स्तर तक की लौकिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद आपने 12 वर्ष हिमालय की गोद में बसे तीर्थ ऋषिकेश में यायावरी करते हुए व्यतीत किए। बाद में आप प्रशासनिक समाहराणालय में नियुक्त हुए। सत्यवादन की ‘बुराई’ आपके व्यक्तित्व में एक ‘लत’ की तरह जुड़ी हुई है। तीक्ष्ण कटाक्ष और बेबाक़ी आपके किरदार का अभिन्न अंग है। यही आपकी रचनाओं में भी परिलक्षित होता है। एक योगी का सा जीवन व्यतीत करने वाले पवन जी का बाह्य तथा भीतरी व्यक्तित्व आमूल-चूल फकीरी से ओत-प्रोत है।
आपकी रचनाएँ संबंध और समाज दोनों में व्याप्त विद्रूपताओं को उजागर करती हैं। सरकार, प्रशासन, समाज और साहित्य आदि तमाम क्षेत्रों में निस्पृह विचाराभिव्यक्ति पवन जी को विशेष बनाती है। आपकी फकीरी ओढ़ी हुई नहीं है अपितु यह आपमें सहज घटित हुई है। पवन जी को पढ़ना एक क्रांति की प्रक्रिया से गुज़रने जैसा है।

पवन श्रीवास्तव की रचनाएँ पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें