कवि-परिचय

HARISH ANAND हरीश आनन्द

12 फरवरी सन् 1957 को दिल्ली में जन्मे हरीश आनन्द दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक हैं तथा हिन्दी में स्नातकोत्तर स्तर तक अध्ययन कर चुके हैं। पत्रकारिता में गहन रुचि होने के नाते आपने पत्रकारिता एवं जनसंचार विषय का भी विधिवत् अध्ययन किया है। आप प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका आलोचना के कला संपादक हैं तथा अनेक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन कर चुके हैं। हाल ही में राजकमल प्रकाशन का वर्ष 2010 का चर्चित साहित्यिक कलैण्डर भी आपने ही तैयार किया है। वर्तमान में आप भारत सरकार के लघु उद्योग मंत्रालय में प्रचार निदेशक तथा वरिष्ठ संपादक के पद पर कार्यरत हैं।
सन् 1997 में प्रकाशित आपके प्रथम काव्य-संग्रह ‘कविता में आदमी’ को दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादमी ने अनुदान दिया। आपकी कविताओं में जहाँ एक ओर मानवीय संवेदनाओं की शैवाली तस्वीर उभरती है वहीं समय के साथ बदलते परिवेश के प्रति एक टीस भी नज़र आती है। बिना किसी लाग-लपेट के सीधे-सीधे अपनी संवेदना का काव्यानुवाद कर देना आपकी विशेषता है। आपने ज़िन्दगी के रवैये और वक्त क़े एक-एक ज़र्रे का बारीक़ी से अवलोकन करते हुए कुछ ऐसी रचनाएँ रची हैं जो एक पल के लिए ठहर कर सोचने को विवश करती हैं।

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