कवि-परिचय

VED PRAKASH VED वेद प्रकाश ‘वेद’

4 मार्च सन् 1964 को दिल्ली में जन्मे वेद प्रकाश ‘वेद’ हिन्दी विषय से स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षाध्ययन कर चुके हैं साथ ही साथ आप बी.एड. की उपाधि भी प्राप्त कर चुके हैं। हिन्दी की वाचिक परम्परा में फूहड़ हास्य को दरकिनार करते हुए आपने शुध्द हास्य तथा तीखे व्यंग्य से अपनी कविताओं तथा प्रस्तुति का अलंकरण किया। आपकी कविताओं में हँसी की फुहार के साथ समसामयिक परिस्थितियों पर ऐसा तीक्ष्ण कटाक्ष देखने को मिलता है जो यकायक श्रोता और पाठक को सोचने पर विवश कर देता है। ‘केवल मनोरंजन न कवि का धर्म होना चाहिए, उसमें उचित उपदेश का भी मर्म होना चाहिए’ की उक्ति को चरितार्थ करते हुए आपने विखंडित होती संस्कृति, पर्यावरण, राजनीति, महंगाई, सामाजिक बुराइयों, अराजकता तथा आतंकवाद तक तमाम विषयों पर अपनी लेखनी चलाई है। और विशेष बात यह कि इन अतिगंभीर विषयों की बात करते समय आप कहीं भी नीरस होते दिखाई नहीं देते।
आपका प्रथम काव्य संग्रह ‘हँसी खेल नहीं’ आपकी लोकप्रिय कविताओं का संकलन है। इस संकलन में वेद का परिचय देते हुए वरिष्ठ हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा लिखते हैं- ‘वेद की कविताओं की मुख्य विशेषता यह है कि इनमें शब्दों की फिज़ूलख़र्ची नहीं है। जिस बात को वेद कहना चाहता है, उस तक पहुँचने के लिए वो न्यूनतम शब्दों का प्रयोग करता है। यही विशेषता उसे गद्यकार से अलग करती है क्योंकि गद्यकार बूंद को सागर तक फैलाता है और कवि सागर को बूंद में समाहित करता है।’
हिन्दी कवि सम्मेलनीय मंच के इस लोकप्रिय कवि को ‘ओमप्रकाश आदित्य सम्मान’ तथा ‘काका हाथरसी सम्मान’ जैसे अलंकरण प्राप्त हो चुके हैं। कविता के पंख लगाकर आप अनेक देशों की यात्रा कर चुके हैं।

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One Response to “VED PRAKASH VED वेद प्रकाश ‘वेद’”

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    Ved Prakash Pandey Says:

    ‘वेद की कविताओं की मुख्य विशेषता यह है कि इनमें शब्दों की फिज़ूलख़र्ची नहीं है। जिस बात को वेद कहना चाहता है, उस तक पहुँचने के लिए वो न्यूनतम शब्दों का प्रयोग करता है। यही विशेषता उसे गद्यकार से अलग करती है क्योंकि गद्यकार बूंद को सागर तक

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