कवि-परिचय

सुभद्राकुमारी चौहान

subhadrakumarichauhan

सन् 1904 में इलाहाबाद के निहालपुर ग्राम में जन्मी सुभद्राकुमारी चौहान की कविताओं में राष्ट्रचेतना और ओज कूट-कूट कर भरा है। बचपन से ही आपके मन में देशभक्ति की भावना इतने गहरे तक पैठ बनाए हुए थी कि सन् 1921 में अपनी पढ़ाई छोड़ आपने असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। आज़ादी की इस लड़ाई में आपने कई बार जेल-यात्रा की। विवाह के बाद आप जबलपुर में बस गईं।
कथनी-करनी की समानता सुभद्रा जी के व्यक्तित्व का प्रमुख अंग है। आपकी रचनाएँ सुनकर मरणासन्न व्यक्ति भी ऊर्जा से भर सकता है। बिना किसी लाग-लपेट के सीधे-सीधे सच्चा काव्य रचने वाली यह कवयित्री सन् 1948 में एक सड़क दुर्घटना में हमसे बिछड़ गई।
‘मुकुल’ और ‘त्रिधारा’ आपके काव्य संग्रह हैं। इसके अतिरिक्त आपने कहानियाँ भी लिखीं, जो ‘बिखरे मोती’, ‘सीधे-सादे चित्र’ और ‘उन्मादिनी’ नामक कहानी संकलनों में पढ़ी जा सकती हैं।

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