पुस्तक-समीक्षा

वसंत तुम कहाँ हो

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विधा- कविता
कवयित्री- स्नेह सुधा नवल
प्रकाशक- अमृत प्रकाशन, दिल्ली
मूल्य- रु १००/-

स्नेह सुधा नवल के काव्य संग्रह ‘वसंत तुम कहाँ हो’ की कविताएँ एक विस्तृत जीवन में समेटे गए गहन एवं नितान्त निजी अनुभवों, स्मृतियों एवं संघर्षों की कविताएँ हैं। इन कविताओं का संसार स्त्री-मन के उन संघर्षों की ओर इशारा करता है, जहाँ शिक्षित, सुसंस्कृत, मध्यम वर्ग की महिलाओं के जीवन में बाहर से सब कुछ सामान्य, ख़ुशहाल एवं पूर्ण दिखता है, परन्तु इस रूपहले आवरण के पीछे बहुत कुछ अप्रिय, अशोभनीय एवं असामान्य छुपा रहता है। जिसे स्वंय जानने एवं अनुभव करने के बाद भी उसे ढँक कर, ऊपर से मुस्कुराते रहना ही नारी जीवन की विवशता होती है।

तुम पुष्प हो माना
अपने मकरन्द में मस्त………………
पर क्यों भूल गए तुम
कि तुम फूल हो
तो मैं काँटा नहीं
तुम्हारी ख़ुशबू हूँ
जिसे तुमने अपने संग
कभी बाँटा नहीं

उगाए जाओ तुम काँटे
मैं फूल ही उगाऊँगी……………
मैं समेट कर सब अपनी अंजुरी से
भर लूंगी अपना आँचल ……………
……यही तो दिया है तुमने मन से

सब कुछ पा कर भी जहाँ एक कभी न भरने वाली रिक्तता, चहुँ ओर फैले कोलाहल के बीच एक कभी न टूटने वाले सन्नाटे से घिरी मनोदशा में सबके बीच खड़ी होकर सबको बहुत दूर से देखती हुई स्नेह सुधा की कवयित्री जब अतीत की ओर हाथ बढ़ाती है तो मन में अभी तक संजोकर रखी स्मृतियों से कुछ ऐसे पल झरने लगते हैं, जो बहुत सुखद हैं पर आज की आपा-धापी में उन्हें पुनः पाना संभव नहीं बल्कि अब मात्र उनकी कल्पना ही की जा सकती है–

उन खण्डहरों की याद
अभी भी ताज़ा बनी है
आज भी जब याद
उस दिन की आती है
मैं अपने ही एक हाथ से
दूसरे को दबा
तुम्हारी कल्पना किया करती हूँ

स्नेह सुधा की कविताओं में नारी संघर्ष सतत् झलकता है, पर वह पुरूष के विरुद्ध नहीं खड़ा है, वह नारी के आगे बढ़ने को, उसके पुरुष हो जाने या सत्ता पलट करने के संघर्ष के रूप में सामने नहीं आता बल्कि वह नारी के अपने में निहित पूरी शक्तियों के साथ, अपने संस्कारों के साथ सामाजिक, पारिवारिक और वैयक्तिक स्तर पर मज़बूती से खड़े रहने का पक्षधर है।
नरेन्द्र मोहन उनकी कविताओं के बारे में लिखते हैं कि इन कविताओं में बिना किसी पूर्वाग्रह के अन्तर्प्रवेश करना चाहिए। संस्कार सम्पन्न, संघर्षशील नारी के पक्ष से लिखी गईं ये कविताएँ विभिन्न परम्परागत प्रतीकों के माध्यम से स्त्री-पुरुष के सम्बन्धों का कथन करती हैं। वे नए ज़माने में नारी अस्मिता के नए रूपों की टोह लेती हैं। ये कविताएँ बुद्धि और भावना के द्वन्द्व में फँसी नारी को, उस ख़ुश्बू की ओर ले जाती हैं, जिसे पुरुष ने अपने संग कभी नहीं बाँटा।
इस संग्रह की कविताएँ अतीत की झाँकियाँ दिखाती, पीछे छूटे पारिवारिक, सामाजिक मूल्यों को, स्मृतियों को समेटती, संजोती और उन्हें संवेदना के धागे में पिरोती चलती हैं। परन्तु कहीं-कहीं भावातिरेक में वे अपनी निजता के दायरे में सिमटकर किसी पुरानी डायरी के वो अधूरे पन्ने बनकर उभरती हैं; जहाँ उन्हें एक निजी अनुभव से निकल कविता बनने का सफ़र अभी करना बाक़ी है। संकलन में अलग-अलग समय पर लिखी गई कविताएँ हैं, जिनके चुनाव करने में थोड़ा और ध्यान दिया जा सकता था, क्योंकि यह संग्रह उनकी समस्त कविताओं का संकलन नहीं है। पर जैसा कि संग्रह की भूमिका में नरेन्द्र मोहन लिखते हैं कि इस संग्रह की कविताओं को मानों/प्रतिमानों के आग्रहों से मुक्त होकर देखा-पढ़ा जाना चाहिए और सीधे-सीधे इन कविताओं में संस्कार, स्मृति और संवेदना की जो त्रिधारा प्रवाहित है, उसका आकलन किया जाना चाहिए।
यह सही है कि उसी प्रकाश में ‘वसंत तुम कहाँ हो’ को पढ़ा जाए पर स्नेह सुधा जिस पृष्ठभूमि से हैं, उनका जो कार्यक्षेत्र है और उस सबके साथ हरीश नवल जी जैसे सूक्ष्म एंव मौलिक दृष्टि रखने वाले साहित्यकार के संग एंव सान्निध्य से बड़ी उम्मीदें बंधती हैं, और एक आशा जन्मती है कि ‘वसंत तुम कहाँ हो’ एक प्रश्न नहीं एक खोज बनेगा और जल्दी ही स्नेह सुधा नवल वसंत को खोजकर अपनी अंजुरी में भरकर अपने अगले संग्रह में लाएंगीं।

-विवेक मिश्र


5 Responses to “वसंत तुम कहाँ हो”

  1. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
    कलम के पुजारी अगर सो गये तो
    ये धन के पुजारी
    वतन बेंच देगें।
    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज “जनोक्ति “आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर ” ब्लॉग समाचार ” से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

  2. Shama says:

    Anek shubhkamnayen!

  3. Shama says:

    Anek aise wasant aapkee qismat me hon !

  4. Jayanti jain says:

    welcome , u r great

  5. इस नए चिट्ठे के साथ आपको हिंदी चिट्ठा जगत में आपको देखकर खुशी हुई .. सफलता के लिए बहुत शुभकामनाएं !!

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