इक इक लम्हा घुट-घुट के था गुज़ारा हमने
वक्त वतन पे पड़ा, बहाया अपने लहू का फव्वारा हमने
कहीं भूल मत जाना, प्यारे वतन के लोगो
यूँ ही न था भारत की तक़दीर को सँवारा हमने

अजय सहगल