वो यक़ीनन ही हर एक दिल में ख़ुशी भर जाएगा
जो अंधेरी बस्तियों में रोशनी कर जाएगा

दौर ज़ुल्मों का अगर रोका गया न दोस्तो
आदमी ख़ुद आदमी के नाम से डर जाएगा

शर्म यूँ नीलाम होने आ गई बाज़ार में
शर्म गर बाक़ी रही तो आदमी मर जाएगा

लूटता फिरता है सबको तीरगी के नाम पर
देखना वो रोशनी के नाम से डर जाएगा

दिल दुखाना, आह भरना और रोना दोस्तो
‘मीत’-सा आशिक़ जहाँ में जीते जी मर जाएगा

अनिल वर्मा ‘मीत’