तुमने कहा था-
”ख़त्म हो चुकी है अब
संवाद की स्थिति
और नहीं हो सकती
कोई बात!”

कारण पूछने पर
कुछ सोच कर
आरोप लगाया था तुमने
मुझ पर ही!

और मैंने भी सोचा था
कि हो भी कैसे सकती है बात
दो भिन्न भाषा-भाषियों में

हाँ!
…तुम्हारी भाषा
देह की थी
और मेरी
मन की!

© संध्या गर्ग