कवि-परिचय

अल्हड़ ‘बीकानेरी’

alhar-bikaneri

17 मई सन् 1937 को हरियाणा राज्य के रेवाड़ी ज़िले में बीकानेर नामक गाँव में जन्मे श्याम लाल शर्मा को ये संसार अल्हड़ बीकानेरी के नाम से जानता है। सन् 1962 में आपने ‘माहिर’ बीकानेरी के नाम से ग़ज़ल की दुनिया में पदार्पण किया। शास्त्रीय संगीत (वोकल) में डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद सन् 1967 में आप हास्य-व्यंग्य के रंगमंच पर ‘अल्हड़’ बीकानेरी के उपनाम से स्थापित हुए। सन् 1970 में आपका प्रथम काव्य संग्रह ‘भज प्यारे तू सीताराम’ प्रकाशित हुआ। सन् 1986 में आपने एक हरियाणवी फीचर फिल्म ‘छोटी साली’ भी बनाई। ‘ठिठोली पुरस्कार’, ‘काका हाथरसी सम्मान’ तथा ‘हास्य रत्न’ समेत अनेक पुरस्कारों, सम्मानों व उपाधियों से आपको विभूषित किया गया।
राष्ट्रपति भवन से लाल क़िले तक और गाँव-गलियों से सात समुन्दर पार तक जहाँ-जहाँ हिन्दी की ख़ुश्बू है, वहाँ आपने अपनी कविताओं तथा शैली के दम पर काव्य-प्रेमियों के दिल पर राज़ किया है।
हास्य को गेय बनाने में दक्ष अल्हड़ जी छन्द और ग़ज़ल के माहिर थे। बेहद सहज, सरल और सरस शैली अल्हड़ जी की रचनाओं की लोकप्रियता का संबल है। जितनी सहजता उनकी रचनाओं में है उतना ही माधुर्य उनके व्यक्तित्व में भी था।
जीवन को वे अपने अलग नज़रिए से देखते थे। काव्य के प्रति वे इतने समर्पित थे कि उसमें किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश उनके यहाँ मुश्क़िल से मिलती है।
अपने दौर में लोकप्रियता के चरम को स्पर्श करने के बाद 16 जून 2009 में काव्य-जगत् को एक ख़लिश देकर अल्हड़ जी हमसे विदा ले गए।

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