रचनाएँ

गुज़रा हुआ कल लिखता हूँ

कुलदीप आज़ाद

नए ज़माने में गुज़रा हुआ कल लिखता हूँ
राज़ खुल जाए न, किरदार बदल लिखता हूँ
ठोकरों की चोट से, ये पाँव पत्थर हो गए
चोट के उन घावों पर, मैं यार ग़ज़ल लिखता हूँ

2 Responses to “गुज़रा हुआ कल लिखता हूँ”

  1. 1
    PARI Says:

    ALL THE VERY BEST “VRY GUD”

  2. 2
    Kuldeep Azad Says:

    Thanks A lot..!

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