सावन आया,
उनके घर, मेरे भी घर।

उनके आंगन में मँडरायीं खूब घटायें काली-काली
उनके आंगन के गमलों में बिखर गयी सुन्दर हरियाली
नूतन किसलय फूट पड़ेे हैं झूम रही है डाली-डाली
कुछ भी हो उनके आँगन की सुन्दरता है बहुत निराली।
उनके घर कोने-कोने में उमड़ा है ख़ुशियों का सागर
सावन आया

घर की बूढ़ी छत ने अपनी जर्जरता दिखलाई
कमरे में पानी भर आया आँगन में पसरी है काई
छोटू, बिट्टू, मुन्नू, मिट्ठू ने अपनी कश्ती तैराई
वह भी खुश हैं मैं भी खुश हूँ सावन तुझको लाख बधाई।
उनका दिल फूलों-सा नाजुक मेरा दिल है जैसे पत्थर।
सावन आया

© ज्ञान प्रकाश आकुल